रामायण हिन्दुओ का सबसे पवित्र ग्रंथो में एक है, इसमें कई ऐसी कथाएं हैं जिन्हे आमतौर पर तो सब लोग जानते हैं, लेकिन कुछ ऐसी बातों का भी वर्णन इसमें मिलता है जिसे अधिकतर लोग नहीं जानते हैं। जैसे–>
 


इस ब्लॉग में हम आपको बताएँगे रामायण से जुड़े कुछ अनकहे और अनसुने रोचक तथ्य के बारे में    

 

 

1. आखिर कैकेयी ने भगवान राम के लिए 14 वर्ष का ही वनवास क्यों मांगा?

 
कैकेय देश के राजा अश्वपति की पुत्री कैकेई थीं। महारानी कैकेयी ने जब राजा दशरथ से श्री राम के लिए 14 वर्ष का वनवास माँगा तो इसके पीछे प्रमुख  कारण बताये जाते हैं
1) दरअसल, त्रेतायुग में प्रशासनिक नियम अनुसार, अगर कोई राजा14 वर्ष के लिए अपना सिंहासन छो़ड़ देता था, तो उसे दोबारा राजा बनने का अधिकार नहीं होता था।यह नियम वाल्मीकि रामायण के अयोध्याखंड में लिखित है।
कैकेयी यह बात जानती थीअतः उन्होंने ठीक 14 वर्ष का वनवास ही माँगा। यह अलग बात है कि बाद में भरत ने सिंहासन पर बैठने से मना कर दिया और वनवास समाप्त करने के बाद श्री राम ही सिंहासन पर बैठे

 

इसी प्रकार, द्वापरयुग युग में यह नियम था कि अगर कोई राजा 13 साल के लिए अपना राजकाज छोड़ देता है तो उसका शासन अधिकार खत्म हो जाता है। इसी नियम की वजह से दुर्योधन ने पांडवों के लिए 12 वर्ष वनवास और 1 वर्ष अज्ञातवास की बात रखी।
अब बात करते हैं कलयुग यानि आज के समय की।
 
क्या आप जानते हैं कि अगर आप अपनी किसी Property के लिए 12 साल की अवधि तक अधिकार का कोई क्लेम नहीं करते हैं तो वह प्रॉपर्टी आपके अधिकार से चली जाती है. यह बात The limitation act 1963 संवैधानिक संशोधन (Constitutional Amendment) में कही गयी है
इस एक्ट के अनुसार प्राइवेट प्रॉपर्टी पर 12 साल और सरकारी प्रॉपर्टी पर 30 साल की अवधि के अंदर अपने अधिकार का क्लेम करना जरूरी है
2) 14 वर्ष वनवास मांगने का कारण उस समय की ये मान्यता थी कि 14 वर्ष तक एक सा जीवनकाल जीने से आदमी का चरित्र और स्वाभाव परवर्तित हो जाता है. 
वाल्मीकि रामायण का एक श्लोक है :

नव प़ञ्च च वर्षाणि दण्डकारण्यमाश्रितः।।2.11.26।।
चीराजिनजटाधारी रामो भवतु तापसः।
 
 
इसका अर्थ है दण्डक वन में 14 वर्ष तक पेड़ की छाल, जानवरों की खाल पहनने और बालों को जटाजूट बनाकर जीवन जीते हुए राम अपना पूरा जीवन तपस्वियों जैसा ही जीने लगेंगे
 
कैकेयी और मंथरा ने यही सोचविचारकर राम के लिए 14 वर्ष का वनवास माँगा क्योंकि इससे भरत का सिंहासन सदा के लिए सुरक्षित हो जायगा। 
इसी के चलते कैकेयी ने राजा दशरथ से श्री राम के लिए 14 वर्ष  का वनवास मांगा था। वह अपने बेटे भरत को राजगद्दी पर देखना चाहती थीं, लेकिन अपने भाई से असीम प्रेम करने वाले भरत ने ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने खुद राजगद्दी का त्याग कर दिया और वनवासी बन गए। इसके बाद जब रावण का वध कर श्रीराम वापस अयोध्या लौटे तो भरत ने सम्मानपूर्वक भगवान राम को उनका सिंहासन वापस सौंप दिया।
 
3) कहा जाता है कि भगवान श्रीराम को वनवास भेजने के पीछे असल में देवताओं का हाथ था। दरअसलभगवान राम के जन्म का उद्देश्य ही रावण वध था। ऐसे में अगर वह वन नहीं जाते, रावण माता सीता का हरण नहीं करता तो रावण वध का उद्देश्य अधूरा रह जाता।
इसलिए देवताओं के अनुरोध पर देवी सरस्वती कैकेयी की दासी मंथरा की मति  फेर देती हैं। दासी मंथरा राम के खिलाफ जो कुछ भी कैकेयी से कहती हैं वो असल में देवी सरस्वती होती हैं। इस तरह  वनवास के जरिए भगवान राम अपना उद्देश्य पूरा करने में सफल हुए।
 
 
2. 14 वर्ष तक लक्ष्मण जी के न सोने का क्या कारण हैं?
 
जब भगवान राम को 14 वर्ष के लिए वनवास जाने का आदेश मिला तो लक्ष्मण जी ने भी अपने भगवान राम और सीता जी के साथ वन में जाने का निर्णय लिया था लक्ष्मण जी के वन जाने की बात सुनकर लक्ष्मण जी की पत्नी उर्मिला भी उनके साथ वन में जाने को तैयार हो गई थी  
तब लक्ष्मण जी ने अपनी पत्नी उर्मिला को समझाते हुए यह कहा था कि वह अपने भगवान राम और सीता जी की सेवा करना चाहते हैं | यदि वनवास में  तुम मेरे साथ रहोगी तो मेरी सेवा में भंग पड़ेगा और मैं ठीक प्रकार से उनकी सेवा नहीं कर पाऊंगा लक्ष्मण जी के इस सेवा भाव को देखकर उनकी पत्नी उर्मिला ने अपने दिल पर पत्थर रखकर लक्ष्मण जी की बात मान ली थी और वह लक्ष्मण जी के साथ वन नहीं गई 
जब लक्ष्मण जी जा रहे थे तब इस सबसे विकट क्षणों में भी उर्मिला आंसू बहा सकी क्योंकि उनके पति लक्ष्मण ने उनसे एक और वचन लिया था कि वह कभी आंसू बहाएंगी, क्यूंकि अगर वह अपने दुःख में डूबी रहेंगी तो परिजनों का ख्याल नहीं रख पाएंगी।
लेकिन अब सवाल यह उठता है कि लक्ष्मण अपनी पत्नी उर्मिला से 14 वर्ष तक दूर रहे तो उर्मिला ने इस दौरान क्या किया?
इस संबंध एक कथा पढ़ने को मिलती है, हालांकि इस कथा का न तो वाल्मीकि रामायण में जिक्र है और ही रामचरित मानस में। कथा यह है कि रावण के पुत्र मेघनाद को यह वरदान था कि जो व्यक्ति 14 वर्षों तक सोया हो वही उसे हरा सकता है। हालांकि लक्ष्मण अपने भाई श्रीराम और भाभी सीता की सुरक्षा और सेवा में इतने लगे रहे कि वे 14 वर्ष तक सो ही नहीं पाए। कथा अनुसार उनके बदले उर्मिला 14 वर्ष तक सोती रही। 
 
 

और पढ़े –>  रावण के जन्म की कथा Birth of Ravan वैदिक कहानियां Quotes and Images

रावण के वध के बाद श्री राम, सीता और लक्ष्मण वापस अयोध्या लौट आए और वहां प्रभु श्री राम के राजतिलक की तैयारी होने लगी। उस समय लक्ष्मण जोरजोर से हंसने लगे। जब लक्ष्मण से इस हंसी का कारण पूछा तो उन्होंने जो कहा कि सारी उम्र उन्होंने इसी घड़ी का इंतजार किया था कि मैं अब श्री राम का राजतिलक होते हुए देखूंगा, लेकिन अब उन्हें निद्रा देवी को दिया गया वो वचन पूरा करना होगा जो उन्होंने वनवास जाने के पहले दिया था।


दरअसल निद्रा ने उनसे कहा था कि वह 14 वर्ष के लिए उन्हें परेशान नहीं करेंगी और उनकी पत्नी उर्मिला उनके स्थान पर सोएंगी। निद्रा देवी ने उनकी यह बात एक शर्त पर मानी थी कि जैसे ही वह अयोध्या लौटेंगे उर्मिला की नींद टूट जाएगी और उन्हें सोना होगा। लक्ष्मण इस बात पर हंस रहे थे कि अब उन्हें सोना होगा और वह राम का राजतिलक नहीं देख पाएंगे। उनके स्थान पर उर्मिला ने यह रस्म देखी थी।

उर्मिला का पतिव्रत एक और वाकया ऐसा है जो यह बताता है की लक्ष्मण की विजय का मुख्य कारण उर्मिला थी। मेघनाद के वध के बाद उनका शव राम जी के खेमे में था जब मेघनाद की पत्नी सुलोचना उसे लेने आयी, पति का छिन्न शीश देखते ही सुलोचना का हृदय अत्यधिक द्रवित हो गया। उसकी आंखें बड़े जोरों से बरसने लगीं।
रोतेरोते उसने पास खड़े की ओर देखा और कहा– 

“सुमित्रानन्दन, तुम भूलकर भी गर्व मत करना की मेघनाद का वध मैंने किया है। मेघनाद को धराशायी करने की शक्ति विश्व में किसी के पास नहीं थी। यह तो दो पतिव्रता नारियों का भाग्य था।”

अब आप सोच में पड़ गये होंगे कि निद्रा देवी के प्रभाव में आकर अगर   उर्मिला 14 साल तक सोती रहींतो सास और अन्य परिजनों की सेवा करने का लक्ष्मण  को किया वादा उन्होंने कैसे पूरा किया।तो उसका उत्तर   भी सीधा है। वो यह  कि सीता माता ने अपना एक वरदान उर्मिला को दे   दिया था। उस वरदान के अनुसार उर्मिला एक साथ तीन कार्य कर   सकती थीं।
 
3. भगवान राम और लक्ष्मण जी कि मृत्यु कैसे हुई? 
  1.  हनुमान जी  के होते हुए भगवान राम को काल यानि यमराज छू भी नहीं सकता था क्योकि हनुमान जी  रामजी के प्राणरक्षक और उनके सबसे बड़े भक्त थे क्योकि वह खुद एक भगवान शिव के अवतार थे इसीलिए उनके पास बलशाली शक्तियां थी जिसकी वजह से बड़े से बड़ा देवता भी उनके नाम से घबराता था। 
  2. भगवान श्री राम की मृत्यु का समय नज़दीक आ चुका था इसीलिए ब्रह्मा जी ने यमराज को राम जी को यह बात बताने के लिए पृथ्वीलोक भेजा लेकिन हनुमान जी के  होते हुए किसी भी तरह की बुरी शक्ति अयोध्या में प्रवेश नहीं कर सकती थी इसीलिए यमराज भी प्रवेश करने में असमर्थ रहे
  3. फिर यमराज ने एक साधू का वेश धारण करके अयोध्या में प्रवेश किया और राम से मिलने का आग्रह किया और राम से बोले की हे प्रभु मैं आपसे अकेले में कुछ बात करना चाहता हूँ जिसके लिए आपको किसी भी व्यक्ति को इस कक्ष के अंदर प्रवेश नहीं कर देना होगा और भगवान राम से वचन लिया की जो कोई भी हमारी बातो को सुनेगा आपको उसे मृत्यु दंड देना पड़ेगा और राम जी ने वचन दे दिया
  4. भगवान राम ने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को उस कक्ष के बाहर खड़ा किया और कहा की किसी को भी अंदर न आने दिया जाये
  5. उसी समय वहां दुर्वाशा ऋषि आ गए और उन्होंने प्रभु राम से मिलने की इच्छा जताई जिसके लिए पहले लक्ष्मण ने उन्हें बताया की वह अभी अंदर है इसीलिए आप कृपया थोड़ी प्रतीक्षा करे।दुर्वाशा ऋषि को गुस्सा आ गया और बोले की अगर तुम मुझे अंदर नहीं जाने दोगे तो मै राम को श्राप दे दूंगा
  6. इससे लक्ष्मण जी बहुत गंभीर समस्या में पड़ गए, उन्होंने सोचा की मै राम जी के ऊपर कोई हानि नहीं पहुँचने दे सकता इसीलिए खुद ही मृत्यु को प्राप्त कर लूंगा इसीलिए वह अंदर कक्ष में चले गए
  7. यह देख कर राम को न चाहते हुए भी वचन के अनुसार लक्ष्मण को मृत्यु दंड देना पड़ा उस समय राज्य से बाहर निकालना ही मृत्युदंड के सामान कहलाता था इसीलिए उन्होंने लक्ष्मण जी को अपने राज्य से बाहर निकाल दिया और लक्ष्मण जी  ने सोचा की वह अपने भाई राम के बिना अधूरे है जिस कारणवश उन्होंने सरयू नदी में जाकर अपने प्राण त्याग दिए
  8. जिस तरह लक्ष्मण राम के बिना अधूरे थे उसी तरह से राम भी अपने भाई लक्ष्मण के बिना अधूरे थे उनके मृत्युदंड देने के बाद और यमराज की बातो को सुनके की अब उनके जाने का समय आ चुका है उन्होंने भी अपने प्राण त्याग करने का निश्चय किया और वह भी सरयू नदी के भूभाग तक जाकर विलुप्त हो गए और विष्णु लोक पहुँच गए
 

4. भगवान श्री राम की मृत्यु के समय हनुमान जी कहाँ थे ?

 
 
  1. हनुमान जी के होते हुए भी काल अयोध्या में प्रवेश कैसे कर गया इसके पीछे भी कहानी है इसके लिए भगवान राम को पहले से ही अपनी मृत्यु का आभास हो चुका था और उन्हें पता था की यमराज उनको लेने के लिए आ रहे है किन्तु हनुमान के होते हुए यह असंभव था
  2. इसीलिए भगवान राम ने अपने महल के फर्श के एक छेद में अपनी अंगूठी को गिरा दिया और हनुमान जी  से उस अंगूठी को ढूंढ कर लाने का आदेश दिया | हनुमान जी अपनी आकृति उस छिद्र के सामान करके उस छिद्र में घुस गए
  3. उसके बाद वह सीधे नागलोक तक पहुँच गए वहां उनकी भेंट नागलोक के राजा वासुकी से हुई। हनुमान जी  ने उन्हें  नागलोक आने का कारण बताया | इसीलिए वासुकी हनुमान को एक अंगूठी के बहुत बड़े ढेर तक लेकर चले गए वहां बहुत सारी अंगूठी थी
  4. जब हनुमान उनमे से एक अंगूठी उठाते है तो वह राम जी की ही होती है उसी तरह से वह जब दूसरी उठाते है तो वह भी श्रीराम की ही थी उन्होंने वासुकी से इसका कारण पूछा तब उन्होंने हनुमान को बताया की समय चक्र और काल चक्र अपनी गति से घूम रहा है जो आया है वह जाएगा और जो जन्मा है वह मरेगा जरुर परन्तु आप उस समय और काल चक्र के नियम बदल रहे थे इस चक्र में भगवान राम की मृत्यु समय भी निश्चित हो चुकी थी आप उस कालचक्र में बाधक बन रहे थे इसीलिए आपको आपके कर्तव्य से भटकाने के लिए नागलोक भेजा गया ताकि काल अयोध्या में प्रवेश कर चुके।
  5. इस तरह से हनुमान भी सभी बातें समझ गए तब उन्होंने सोचा की जब वह लौटेंगे तो भगवान राम नहीं होंगे और राम नहीं है तो मेरा ये शरीर भी किसी काम का नहीं और मेरे लिए यह दुनिया भी कुछ नहीं। 
 
5. क्या रावण ने माता कौशल्या का भी अपहरण किया था ?
 श्रीराम की माँ कौशल्या,कौशल देश की राजकुमारी थी। इनकेपिता का नाम सकौशल माताका नाम अमृत प्रभा था। पूर्वजन्म में भगवान विष्णु ने कौशल्या को त्रेता युग में उनकेगर्भ से जन्म लेने का वरदान दिया था। इसी कारणवो भगवानराम के रूप में इस धरतीपर अवतरितहुए।

 

रामायण के कई संस्करण हैं। इन्ही में से एक आनंद रामायण के अनुसार रावण ने केवल देवी सीता का अपहरण किया था। बल्कि कौशल्या का भी अपहरण किया था। ब्रह्मा जी ने रावण को पहले ही बता दिया था कि दशरथ और कौशल्या का पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। अपनी मृत्यु को टालने के लिए रावण ने कौशल्या का अपहरण कर उन्हें एक डिब्बे में बंद करके कौशल्या जी को एक समुद्र से घिरे द्वीप पर छोड़ दिया था।
 
6. क्या श्रीराम कि कोई बहन भी थी?
श्रीराम जी की एक बहन भी थी जिनका नाम शांता था जिनको बचपन में ही कौशल्या जी ने अपनीबहन वर्षनीऔर अंगदेशके राजागोपद को गोद दे दिया था। इसलिए रामायण में शांता का वर्णन नहीं मिलता।
 
7. वनवास के समय श्रीराम कि उम्र क्या थी?
जिस समय श्री राम वनवास को गए थे उस समय उनकी आयु 27 वर्ष थी राजा दशरथ नहीं चाहते थे की राम वन जाये। इसीलिए राजा दशरथ ने उन्हें सुझाव दिया की वे उन्हें बंदी बना लें और राजगद्दी पर बैठ जाये लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम राम ऐसा कभी नहीं करते।
 
8. सीता स्वयंवर में भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढाने की शर्त  क्यों रखी गयी थी?
मानाजाता है की देवीसीता भगवान शिव के धनुषको बचपनसे ही खेलखेल में उठा लेती थी और इसलिए  उनके स्वंयवरमें इस धनुष जिसका नाम पिनाका था,उस पर प्रत्यंचा चढाने की शर्त रखी गयी थी

 

 
9. नंदी ने रावण को क्यों श्राप दिया था ?
एक बार रावण जब भगवान शिव के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत गए। उन्हें मार्ग में नंदी मिले जिनको रावण ने वानर के मुँह वाला कहकर उसका उपहास उड़ाया। नंदी ने तब रावण को श्राप दिया की वानरों के कारण ही तुम्हारी मृत्यु होगी। आगे चलकर क्या हुआ ये तो सब जानते ही हैं।
 
10. माता सीता को इतने समय तक बंदी रखने के बाद भी रावण ने उनको क्यों नहीं छुआ था?
अपने विजय अभियान के दौरान रावण जब स्वर्ग पहुचें  तो वहां उन्हें रम्भा नाम की एक अप्सरा मिली। रावण उन  पर मोहित हो गएरावण ने उन्हें छूने का प्रयास किया तो उन्होंने कहा की- मैं आपके भाई कुबेर पुत्र नलकुबेर के लिए आरक्षित हूँ। इसलिए मैं आपकी पुत्रवधु के समान हूँ।पर रावण अपनी शक्ति में इतने चूर थे की उन्होंने उनकी एक ना मानी। जब नलकुबेर को इस बात का पता चला तो उन्होंने रावण को श्राप दिया की आज के बाद यदि रावण ने किसी पराई स्त्री को उसके इच्छा के विरुद्ध छुआ तो उसके मस्तक के 100 टुकड़े हो जायेंगे।
11. देवी सीता लंका में बिना अन्न– जल ग्रहण किये इतने समय जिन्दा कैसे रही
जिस दिन रावण सीता का हरण करके अशोक वाटिका में लाये थे। उसी दिन ब्रह्मा जी ने एक विशेष खीर इंद्र के हाथों देवी सीता तक पहुंचाई थी। इंद्र ने देवी सीता के पहरे पर लगे राक्षसों को अपने प्रभाव से सुला दिया। जिसके बाद इंद्र ने देवी को वो दिव्य खीर दी जिसे ग्रहण कर देवी सीता की भूख प्यास शांत हो गयी और वो अशोक वाटिका में बिना कुछ भी खाये पिए रह सकी।
 
12. क्या रावण ने अपना बाजू काटकर वाद्ययंत्र बनाया था?
 रावणभगवान शिव का अनन्यभक्त था। भगवान शिव के भजन कीर्तन के लिए रावणने एक बार अपनीबाजू काटकर उससेएक वाद्ययंत्र भी बनायाथा। जिसेरावण हट्टा का नाम मिला।
 
13. लक्ष्मण जी ने रावण के किन किन पुत्रो का वध किया था ?
शेषनागके अवतारलक्ष्मण ने रावण के पुत्र मेघनाद को ही नहींउसके दूसरे पुत्रोंजैसे प्रहस्त और अतिकाय को भी माराथा।
 
14. रावण की मृत्यु रघुवंशी राजा के हाथो क्यों हुई ?
रावण जब विश्व विजय पर निकला तो उसका युद्ध अयोध्या के राजा अनरण्य के साथ हुआ। जिसमे रावण विजयी रहा। राजा अनरण्य वीरगति को प्राप्त हो गए। उन्होंने मरते हुए श्राप दिया की तेरी मृत्यु मेरे कुल के एक युवक द्वारा होगी।
 
15. रावण की मृत्यु का कारण एक स्त्री क्यूँ बनी?
बाल्मीकिरामायण के अनुसार एक बार रावणअपने पुष्पक विमानसे जा रहा था। उसने एक सुन्दर युवती को तप करतेदेखा। वह युवती वेदवती थी जो भगवानविष्णु को पति के रूप में पाने के लिए तपस्याकर रही थी। रावणउस पर मोहित हो गया और उसे जबरदस्तीअपने साथ ले जानेका प्रयासकरने लगा। तब उस युवतीने रावणको श्रापदिया की तेरी मृत्यु का कारण एक स्त्री बनेगी और उसने अपने प्राणत्याग दिए।
 
16. राम और लक्ष्मण को किसने बंदी बनाया था ? 
पातालका राजाअहिरावण और उसका भाई महिरावण बेहद ही शक्तिशाली असुर थे। अहिरावण ने राम और लक्ष्मण को बंदी बना लिया था। प्रभु राम और लक्षमणको बचानेऔर अहिरावणमहिरावण के वध के लिए हनुमानको पंचरूपीरूप लेनापड़ा था। 

 
17. गिलहरी के शरीर पर धारियाँ क्यों होती हैं? 
मानाजाता है की गिलहरीके शरीरपर जो धारियां है वे भगवानराम के आशीर्वाद के कारण है। जिस समय लंका पर आक्रमण करने के लिए राम सेतु का निर्माण हो रहा था उस समय एक गिलहरीइस काम में मदद कर रही थी। उसकेइस समर्पणभाव को देखकर श्री राम ने प्रेमपूर्वक अपनी अंगुलियां उसकी पीठ पर फेरीथी। ऐसी मान्यता है की  तब से उसकेशरीर पर धारियां पड़ गई
 
18.  भगवान श्रीराम को क्यों कहते हैं मर्यादा पुरुषोत्तम, ये है कारण
     हिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है जिसका अर्थ है सदैव मर्यादा के अनुसार कार्य करने वाला सबसे श्रेष्ठ पुरुष। भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया और हमेशा धर्मानुसार आचरण किया।

 

 
पिता के कहने पर 14 वर्ष के वनवास पर जाने का प्रसंग हो या साधारण मनुष्य की तरह रावण जैसे महाबली राक्षस का वध करने का। श्रीराम ने अपना पूरा जीवन मर्यादा के अनुरूप ही निर्वाह किया।
 
 
श्रीराम स्वयं भगवान विष्णु के अवतार थे, वे चाहते तो पलभर में ही रावण को मारकर सीता को उसके दासत्व से मुक्त करा सकते थे लेकिन ऐसा करने से मर्यादा का हनन होने का भय था इसलिए श्रीराम ने साधारण मनुष्य की तरह ही पहले सीता की खोज की, समुद्र पर बांध बनाया और मर्यादा अनुरूप ही युद्ध कर रावण का वध किया। भगवान श्रीराम ने पुत्र, पति, भाई, मित्र, पिता तथा राजा आदि सभी संबंधों का निर्वाह मर्यादा के अनुरूप ही किया। इसलिए भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है।


 दोस्तों, आशा करता हूँ यह पोस्ट आप सब को पसंद आई होंगी, कृपया इसे अपने मित्रो को शेयर करें 



LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here